क्या आपने कभी सोचा है कि आखिरी बार अपनी आंखें कब जंचवाई थीं? ज्यादातर लोग तभी डॉक्टर के पास जाते हैं जब चश्मे का नंबर बदलने लगे या दिखना काफी धुंधला हो जाए। लेकिन आंखों की कई समस्याएं शुरुआती चरण में कोई साफ लक्षण नहीं देतीं। व्यक्ति को लगता है कि सब ठीक है, जबकि अंदर ही अंदर बदलाव शुरू हो चुका होता है। इसीलिए विश्व दृष्टि दिवस 2026 हमें याद दिलाता है कि आंखों की देखभाल को टालना नहीं चाहिए।
विश्व दृष्टि दिवस (World Sight Day) हर साल अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। 2026 में यह 8 अक्टूबर को है। इसका उद्देश्य अंधेपन और दृष्टि-दोष की रोकथाम, आंखों की जांच और सुलभ नेत्र-देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। दुनिया भर में स्वास्थ्य संस्थाएं, अस्पताल और समुदाय इस दिन लोगों को समय पर जांच और इलाज के महत्व के बारे में बताते हैं।
इस वर्ष के अभियान में #LoveYourEyes का संदेश है। यानी जैसे हम अपने शरीर के बाकी हिस्सों का ध्यान रखते हैं, वैसे ही आंखों को भी प्राथमिकता दें, उनकी नियमित जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें।
बहुत से लोग मानते हैं कि आंखों की जांच का मतलब बस चश्मे का नंबर पता करना है। असल में एक व्यापक (comprehensive) जांच में डॉक्टर यह भी देखते हैं कि:
यानी यह जांच आपकी आंखों की पूरी सेहत की तस्वीर देती है, सिर्फ "कितना दिखता है" यह नहीं।
बच्चे अक्सर यह नहीं बता पाते कि उन्हें दिक्कत है। वे किताब आंखों के बहुत पास रखते हैं, टीवी या मोबाइल बहुत नजदीक से देखते हैं, बार-बार आंखें मलते हैं या सिरदर्द की शिकायत करते हैं। ऐसे में माता-पिता को जांच करानी चाहिए। बचपन में पकड़ी गई समस्या का इलाज अक्सर आसान होता है और पढ़ाई व विकास पर भी असर कम पड़ता है।
लंबे समय तक कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन, जलन और सिरदर्द हो सकता है। अगर ये परेशानियां बार-बार हो रही हैं, तो जांच कराना समझदारी है। हो सकता है चश्मे का नंबर बदल गया हो या आंखों के सूखेपन के लिए इलाज की जरूरत हो।
इस उम्र के बाद पास की चीजें पढ़ने में कठिनाई शुरू हो सकती है। साथ ही मोतियाबिंद, काला मोतिया (glaucoma) और रेटिना से जुड़ी समस्याओं का जोखिम धीरे-धीरे बढ़ता है। इस उम्र के बाद नियमित जांच की आदत डालना फायदेमंद है। कितने अंतराल पर जांच करानी है, यह डॉक्टर आपके जोखिम के आधार पर बताएंगे।
बुजुर्गों में मोतियाबिंद, glaucoma और उम्र से जुड़ी रेटिना की समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं। कम दिखने से गिरने और चोट लगने का खतरा भी बढ़ता है। नियमित जांच से समस्या का समय रहते पता चल सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर रखने में मदद मिलती है।
लंबे समय तक ब्लड शुगर अनियंत्रित रहे तो रेटिना की छोटी रक्त-वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है, जिसेडायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखते, इसलिए डायबिटीज वालों को दिखने में कोई दिक्कत न होने पर भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रेटिना जांच करानी चाहिए। डायबिटीज मोतियाबिंद का जोखिम भी बढ़ा सकती है; इसके बारे में विस्तार से पढ़ें: डायबिटीज और मोतियाबिंद का संबंध।
नीचे दिए लक्षण दिखें तो जल्द से जल्द नेत्र रोग विशेषज्ञ (ophthalmologist) से मिलें:
ये लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार करने वाले नहीं हैं।
डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण और जोखिम के आधार पर तय करते हैं कि कौन-सी जांच जरूरी है। हर व्यक्ति को सभी टेस्ट की जरूरत नहीं होती। कुछ आम जांचें:
अभिनव दृष्टि आई हॉस्पिटल में ऐसी कई डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। कौन-सी जांच आपके लिए जरूरी है, यह विशेषज्ञ डॉक्टर ही तय करेंगे।
नहीं। ऑनलाइन टेस्ट या मोबाइल ऐप्स पर होने वाली सेल्फ-जांच किसी योग्य डॉक्टर द्वारा की गई पूर्ण जांच का विकल्प नहीं हो सकतीं। ये ज्यादा से ज्यादा एक मोटा अंदाजा दे सकती हैं और कई गंभीर बीमारियों को पकड़ नहीं पातीं। इसलिए अपनी नजर के बारे में कोई भी चिंता हो तो विशेषज्ञ से ही जांच कराएं।
Abhinav Drishti Eye Hospital महानगर, लखनऊ में स्थित है और मोतियाबिंद, LASIK/रिफ्रैक्टिव सर्जरी, glaucoma, रेटिना, कॉर्निया तथा अन्य नेत्र-देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराता है। यहां आवश्यकता के अनुसार डायग्नोस्टिक जांचों के साथ विशेषज्ञ परामर्श मिलता है।
अगर आपको अपनी आंखों की रोशनी में कोई बदलाव महसूस हो रहा है या आपकी नियमित eye checkup due है, तो qualified ophthalmologist से comprehensive eye examination के लिए सलाह लें।
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है।